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कम्पनी परिचय

Page last modified on : July 03, 2017

नालको देश में एक वृहत्तम एकीकृत बॉक्साइट-एल्यूमिना-एल्यूमिनियम-विद्युत संकुल है। इस कम्पनी के ओड़िशा के कोरापुट जिले के दामनजोड़ी में अवस्थित 68.25 लाख टन प्रतिवर्ष की बॉक्साइट खान और 21.00 लाख टन प्रतिवर्ष(नियामक क्षमता) का एल्यूमिना परिशोधक है और ओड़िशा के अनुगुळ में 4.60 लाख टन प्रतिवर्ष का एल्यूमिनियम प्रद्रावक एवं 1200 मेगावाट क्षमता का ग्रहीत विद्युत संयंत्र है। नालको की एल्यूमिना/एल्यूमिनियम के निर्यात और कॉस्टिक सोड़ा के आयात के लिए विशाखापत्तनम् बन्दरगाह में थोक जहाजी-लदान की सुविधाएँ हैं तथा कोलकाता और पारादीप बन्दरगाहों की सुविधाओं का भी उपयोग किया जाता है। देशीय बाजार में विपणन को सुसाध्य बनाने के लिए दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई, चेन्नै और बॆंगळूरु में कम्पनी के पंजीकृत बिक्री कार्यालय हैं और देश में विभिन्न स्थानों पर इसके ग्यारह स्टॉकयार्ड हैं।

वुड मैक्केंजी की रिपोर्ट के अनुसार यह कम्पनी विश्व में धातुकर्मीय ग्रेड एल्यूमिना का कम लागत वाला उत्पादक है। निरन्तर गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के साथ, वर्ष 2016-17 में इस कम्पनी के कुल बिक्री-कारोबार की लगभग 46% की निर्यात आय हुई और सार्वजनिक उद्यम सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 में इस कम्पनी को द्वितीय उच्चतम शुद्ध निर्यात आय करनेवाला केंद्रीय लोक उद्यम का दर्जा मिला था।

क्षमता उपयोग, प्रौद्योगिकी समावेशन, गुणवत्ता आश्वासन, निर्यात कार्य-निष्पादन और लाभार्जन में अपने निरन्तर ट्रेक रिकार्ड के साथ, नालको भारत की औद्योगिक क्षमता का एक उज्ज्वल उदाहरण है।

मई 1989 से लन्दन धातु बाजार (एल.एम.ई.) में पंजीकरण के साथ नालको वह पहली सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी है, जिसने अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में एक बड़े रूप में प्रवेश किया। यह कम्पनी 1992 से मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और 1999 से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है। साथ ही यह आई.एस.ओ.-9001, आई॰एस॰ओ॰-14001, ओ.एच.एस.ए.एस.-18000 एवं एस.ए.-8000 प्रमाणपत्र-धारी है; कम्पनी ने ऊर्जा प्रबन्धन प्रणाली के लिए आई.एस.ओ.-50001 मानकों को भी अपनाया है।

हर मौसम में उपयुक्त व्यवसाय के एक नए प्रतिमान का अनुसरण करते हुए, नालको की धूसर क्षेत्र और हरित क्षेत्र विस्तार परियोजनाओं की व्यापक योजनाएँ हैं, जिनमें ओड़िशा में निवर्तमान एल्यूमिना परिशोधक, दामनजोड़ी में (धूसरक्षेत्र में) एक मि.टन प्रतिवर्ष क्षमता की चालू 5वीँ धारा की परिशोधक परियोजना, पोट्टांगी बॉक्साइट खान, उत्कल डी एवं ई कोयला खान का विकास, और ओड़िशा में 6 लाख टन प्रतिवर्ष हरित-क्षेत्र और 5 लाख टन प्रतिवर्ष धूसरक्षेत्र प्रद्रावकों का विकास शामिल है। प्रस्तावित प्रद्रावक विस्तार के लिए विद्युत की आपूर्ति एन.टी.पी.सी. के साथ संयुक्त उद्यम में 2400 मेगावाट की कोयला आधारित विद्युत परियोजना से की जाने हेतु परिकल्पित है।

एक जिम्मेदार निगम के रूप में इस कम्पनी ने 198 मेगावाट पवन विद्युत परियोजना चालू करके नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र पर बल दिया है और 70 मेगावट सौर तथा 50 मेगावाट पवन विद्युत परियोजनाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। आधारभूमि एकीकरण के लिए, यह कम्पनी गुजरात में गुजरात अल्कालिज एण्ड केमिकल्स लिमिटेड (जी.ए.सी.एल.) के साथ संयुक्त उद्यम में 2.7 लाख टन प्रतिवर्ष कॉस्टिक सोड़ा संयंत्र के लिए अग्रसर है। अग्रगामी एकीकरण के भाग रूप में, नालको ने एल्यूमिनियम उद्योग से संबंधित ऊर्ध्वप्रवाह एवं अनुप्रवाह उत्पादों संबंधी सहायक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए, ओड़िशा इण्डस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कोर्पोरेशन (इडको) के साथ अनुगुळ एल्यूमिनियम पार्क प्रा॰ लि॰ (ए.ए.पी.पी.एल.) नामक सं.उ. कम्पनी स्थापित की है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है और तप्त धातु के लिए मूल्य निर्धारण को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

लगभग 160 मिलियन टन खननयोग्य भण्डार के साथ उत्कल-डी एवं ई के आबंटन तथा लगभग 75 मिलियन टन के खननयोग्य भण्डार के साथ पोट्टांगी बॉक्साइट भण्डार के लिए वचनबद्धता से कच्चे माल अर्थात् बॉक्साइट और कोयला के मामले में कम्पनी की दीर्घावधि सुरक्षा को बड़ा बल मिला है।

यह कम्पनी अपनी अनुसन्धान एवं विकास गतिविधियाँ का अनुशीलन उत्साह से करती है और 31 पेटेण्ट दर्ज किए हैं जिनमें से 9 पेटेण्ट मंजूर हो चुके हैं तथा 5 का व्यावसायीकरण हो चुका है। अपशिष्ट को धन में बदलने के लिए अपने प्रयास के अंश रूप में, यह कम्पनी लाल पंक से लौह सान्द्र, भुक्त लिक्वर से गैलियम उबारने के लिए प्रयासरत है। कम्पनी ने प्रद्रावक के बहिःस्रावी जल को संदूषण-मुक्त करने के लिए नानो-तकनीकी आधारित डी-फ्लूराईडेशन प्रक्रिया चालू की है जो अपने प्रकार की पहली है और इससे इस क्षेत्र की फ्लूओराइड संदूषित होने की दीर्घकाल की समस्या का समाधान हुआ है।

कम्पनी उन क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाने में सक्रियता से संलग्न रही है, जहाँ यह प्रचालित है। विस्थापित परिवारों का पुनर्वास, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय सृजन, स्वास्थ्य-देखभाल और स्वच्छता, शिक्षा, कौशल विकास, पीने के साफ पानी की आपूर्ति, आनुषंगिक सुविधाओं का विकास, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय उपायों, ग्रामीण विकास, कला, दस्तकारी एवं संस्कृति को प्रोत्साहन तथा विभिन्न मानवीय सद्भावना मिशन से नालको ने निगम विश्व में एक गौरवमय स्थान हासिल किया है। कम्पनी अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन के तहत यह कम्पनी तत्काल पूर्ववर्ती तीन वित्त वर्षों के अपने शुद्ध लाभ के औसत का 2% निगम सामाजिक उत्तरदायित्व गतिविधियों के लिए आरक्षित करती है। अपने स्थापना काल से ही, नालको वित्तवर्ष 2016-17 तक लगभग ₹297 करोड़ निगम सामाजिक उत्तरदायित्व गतिविधियों के लिए खर्च कर चुकी है। नालको ने अपने संयंत्रों के परिधीय गाँवों के लोगों की मूल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक समानुभूतिक रूप से निगम सामाजिक उत्तरदायित्व गतिविधियाँ संचालित करने के लिए 2010 में एक स्वचलित फाउण्डेशन की स्थापना की।

नालको सदा से सरकारी कल्याण योजनाओं की ध्वजाधारक रही है। स्वच्छ विद्यालय अभियान के अन्तर्गत नालको ने ओड़िशा और आन्ध्र प्रदेश में 473 शौचालयों (लक्ष्य का 133%) का समय के पहले निर्माण किया। नालको के इस प्रयास की मा.सं.वि. मंत्रालय द्वारा विधिवत् प्रशंसा की गई। माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान पर "बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ अभियान" के साथ हाथ मिलाते हुए नालको ने "नालको की लाड़ली योजना" के अधीन 181 गरीब एवं गुणवान कन्याओं को गोद लिया है। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन और प्रतिष्ठित तीर्थस्थल विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत श्री जगन्नाथ मन्दिर, पुरी एवं इसके आसपास के क्षेत्र में आनुषंगिक सुविधाओं के विकास और स्वच्छता के रख-रखाव के लिए 13 परियोजनाएँ हाथ में ली गई हैं।

युवाओं के सशक्तीकरण के द्वारा राष्ट्र निर्माण की दिशा में, नालको ने कौशल विकास के लिए नि.सा.उ. निधि का 10% अंशदान देने की वचनबद्धता की है। बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान करने के लिए भुवनेश्वर में खनन क्षेत्र में कौशल विकास के लिए एक उत्कर्ष केन्द्र का उद्घाटन किया गया है।

परिधीय गाँवों के निवासियों को बेहतर स्वास्थ्य-देखभाल सेवा प्रदान करने के लिए, नालको खान एवं परिशोधन संकुल, दामनजोड़ी के 163 परिधीय गाँवों में 4 मोबाईल स्वास्थ्य एकक और पोट्टांगी में 1 मोबाईल स्वास्थ्य एकक संचालित करती है। इसीप्रकार, प्रद्रावक एवं विद्युत संकुल, अनुगुळ में 39 परिधीय गाँवों को शामिल करते हुए 3 मोबाईल स्वास्थ्य एकक और दो वाह्य रोगी विभाग संचालित किए जाते हैं। प्रतिवर्ष 1 लाख से अधिक रोगियों का उपचार किया जाता है।

परिधीय गाँवों के आदिवासी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए, नालको ने प्रसिद्ध आवासीय शिक्षा संस्थानों यथा (1) कलिंग इंस्टीच्यूट ऑफ सोसियल साईन्सेस (किस्स), भुवनेश्वर, (ii) कोरापुट डेवलपमेंट फाउण्डेशन (केडीएफ), जयपुर और (iii) विकास विद्यालय, कोरापुट के साथ सहयोग किया है। कम्पनी ने अभी तक 18 आदिवासी बहुल परिधीय गाँवों के 755 बच्चों को आवासीय शिक्षा के लिए भरती कराया है। इन विद्यार्थियों की स्कूली शिक्षा पूरी होने तक उनकी पढ़ाई, आवास और भोजनादि की बाबत कुल लागत का वित्तपोषण नालको द्वारा वहन किया जा रहा है।