अपडेट
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निदेशक मण्डल

CMD Profile Picture

डॉ. तपन कुमार चान्द

अध्यक्ष-सह-प्रबन्ध-निदेशक

डॉ. तपन कुमार चान्द दिनांक 27.07.2015 को अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के रूप में कम्पनी से जुड़े। डॉ. चान्द अत्यंत सक्षम एवं अनुभवी पेशेवर व्यक्ति हैं जिनके पास खनन और धातुक्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है, जिनमें से 8 वर्ष कोयला एवं इस्पात क्षेत्र में निदेशक के रूप में कार्यकलापों को उन्होंने संभाला है।

उत्कृष्ट विद्वान और अपने विद्यार्थी काल में स्वर्ण पदक प्राप्त, उन्होंने स्लोवेनिया एवं क्वीन्सलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, ऑस्ट्रेलिया में इंटरनेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एन्टरप्राइजेस में प्रशिक्षण लिया है। एक वृत्तक के रूप में उत्कृष्ट कार्य-निष्पादन के लिए उन्हें जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

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सरकारी मनोनीत निदेशक

डॉ. के. राजेश्वर राव
सरकारी मनोनीत निदेशक

डॉ. के . राजेश्वर राव 19.02.2018 को निदेशक मंडल में अपर निदेशक के रूप में शामिल किये गए थे।

1 जुलाई, 1962 को जन्, डॉ. के . राजेश्वर राव के पास यूनिवर्सिटी ऑफ जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली से समाज विज्ञान में डॉक्टर ऑफ फिलोसॉफी (पीएच.डी.) डिग्री है। उनका संबंध त्रिपुरा संवर्ग से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1988 बैच से है। वे वर्तमान में, खान मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली में अपर सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। डॉ. के . राजेश्वर राव के पास केन्द्रीय मंत्रालयो, राज्य सरकारो एवं सार्वजिनक क्षेत्र की कंपनियो में कार्य करने का पर्याप्त अनुभव है।

श्री अनिल कुमार नायक
सरकारी मनोनीत निदेशक

श्री अनिल कुमार नायक 27.03.2018 को अपर निदेशक के रूप में निदेशक मंडल में शामिल किया गया।

16.05.1962 को जन्मे, श्री अनिल कुमार नायक ने स्कूल ऑफ इंटरनैशनल स्टडीज, जेएनयू, नई दिल्ली से राजनीित में एम.ए. एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के आइवरी कोस्ट में जातीयता एवं राजनीति विकास में एम.फिल पूरा किया है। वे 15 फरवरी, 1987 को भारतीय आयुध कारखाना सेवाएँ (आईओएफएस-1986 बैच) से जुड़े। अगस्त 2015 में श्रम मंत्रालय में मुख्य श्रम आयुक्त के रूप में जुड़ने के पूर्व 41 आयुध कारखानो से संलग्न संपूर्ण सं गठन के औद्योिगक सं बंधो का खयाल रखने के प्रयोजन से उप महानिदेशक, आयुध कारखाना बोर्ड, कोलकाता के पद पर तैनात थे। उनके पास अन्य सरकारी विभागो अंर्थात् 5वें वेतन आयोग में अवर सचिव, रक्षा मंत्रालय में उप सचिव, बिहार और ओड़िशा के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त ग्रे.1, खान मंत्रालय में निदेशक के रूप में कार्य करने का व्यापक अनुभव है। मार्च 2018 में उन्हें संयुक्त सचिव, खान मंत्रालय के रूप में नियुक्त किया गया। वे अपने साथ तकनीकी एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में क्षेत्रों व्यापक अनुभव लेकर आए हैं।

कार्यपालक निदेशक

श्री व्ही. बालसुब्रमण्यम
निदेशक (उत्पादन)

श्री व्ही. बालसुब्रमण्यम् 01.01.2015 से निदेशक (उत्पादन) के रूप में कंपनी से जुड़े।

01.12.1960 को जन्मे, श्री व्ही. बालसुब्रमण्यम् ने रसायन इंजीनियरिंग में बी.टेक पूरा करने के बाद नालको में स्नातक अभियंता प्रशिक्षु (जीईटी) के रूप में 1984 में योग किया था। नालको के साथ जुड़ी अपने तीन दशको की दीर्घ सेवा के दौरान, श्री बालसुब्रमण्यम् ने एल्यूमिनियम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी अभिग्रहण से लेकर समावेशन तक महत्वपूर्ण योगदान किया। अपने व्यापक विृत्तक अनुभव के साथ, जिसमें नालको के दोनो उत्पादन सं कुलो में परियोजना कार्यान्वयन से सं यंत्र परिचालन शामिल है, श्री बालसुब्रमण्यम् ने निदेशक (उत्पादन) के पद पर जुड़ने से पूर्व संगठन में अत्यन्त नाजुक एवं महत्वपूर्ण पदभार सं भाले।

श्री बालसुब्रमण्यम् इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (आई आई एम) के आजीवन सदस्य, फेडरेशन इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (एफआईएमआई) की प्रबंधन समिति के सदस्य एवं भारतीय उद्योग महासंघ (सीआईआई) की ओड़िशा शाखा के ऊर्जा पैनल के सदस्य भी हैं।

श्री बसन्त कुमार ठाकुर
निदेशक (मानव संसाधन)

श्री बसन्त कुमार ठाकुर 04.07.2016 से कंपनी के निदेशक (मानव संसाधन) हैं।

19.12.1959 को जन्मे, श्री बसन्त कुमार ठाकुर पंजाब विश्वविद्यालय से इतिहास में डिग्री के साथ सामाजिक कार्यों में डिप्लोमाधारी हैं। उन्होंने भारतीय इस्पात प्राधिकरण िल. में 1981 में अपनी आजीविका की शुरुआत की और नालको में निदेशक (मानव संसाधन) के पद पर जुड़ने के पूर्व, दुर्गापुर इस्पात संयंत्र, बोकारो इस्पात संयंत्र, सालेम इत्पात संयंत्र समेत विभिन्न एकको में, राँची में अनुसंधान व विकास केन्द्र एवं नई दिल्ली में निगम कार्यालय में सेवारत रहे। श्री ठाकुर भर्ती, अवधारण, संघर्ष वियोजन, प्रबंध परिवर्तन, श्रमिक संबंध एवं हित प्रशासन सहित मानव सं साधन के विभिन्न क्षेत्रों में क्षेत्रों व्यापक अनुभव के साथ एक विशेषज्ञ विृत्तक हैं। निगम संचार में उनके पास चार वर्षों का अनुभव है। भारतीय इस्पात प्राधिकरण में, सांगठनिक लक्ष्यों के समर्थन एवं सुदृढ़ करने की दिशा में व्यापक सांगठनिक रणनीतिक योजना सं चालित करने के लिए, उन्होंने वरिष्ठ प्रबंधन के साथ मिलकर कार्य किया। भारतीय इस्पात प्राधिकरण में तीन दशको के लम्बे कार्यकाल के दौरान मानव सं साधन प्रणाली, समस्त मानव संसाधन कार्यकलापो की नीति और प्रक्रिया विकास, प्रशिक्षण, परामर्श, आयोजना, निदेशन और प्रबंधन को अद्यतन करते हुए मानव सं साधन विभाग के पुनः निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री ठाकुर एन.आई.पी.एम. के आजीवन सदस्थ हैं।

श्री संजीव कुमार रॉय
निदेशक (परियोजना एवं तकनीकी)

श्री संजीव कुमार रॉय 03.02.2017 से कंपनी के निदेशक (परियोजना एवं तकनीकी) हैं।

श्री रॉय रामकृष्ण मिशन विद्यामंदिर, बेलुड़ मठ से बी.एससी (रसायन में ऑनर्स) और फिर कोलकाता विश्वविद्यालय से रसायन इंजीनियरिंग विषय में बी.टेक और एम.टेक पूरा किया। वर्ष 1984 में उन्होंने नालको में स्नातक अभियंता प्रशिक् के रूप में अपनी आजीविका की शुरुआत की। वे कंपनी के एल्यूमिना परिशोधन संकुल, दामनजोड़ी में इस परियोजना के आरम्भ से ही तैनात थे, जहाँ उन्होंने महाप्रबंधक (परिशोधक) बनने के पूर्व दो चरणो के विस्तार कार्यक्रम सहित अनेक प्रमुख पदभार संभाले। तत्पश्चात् मई 2012 में कार्यपालक निदेशक (प्रद्रावक एवं विद्युत) के पद पर पदोन्नत होने के पूर्व वे अनुगुल में कंपनी के प्रद्रावक संयंत्र में महाप्रबंधक (प्रद्रावक) के पद पर तैनात थे। श्री रॉय अप्रैल, 2015 में कार्यपालक निदेशक (उत्पादन) के पद पर मुख्यालय भुवनेश्वर में तैनात हुए।

श्री रॉय अपने साथ सं कल्पना से लेकर चालू करने तक परियोजनाओ के प्रबंधन के साथ-साथ कंपनी संयंत्र एवं प्रचलनो का व्यापक अनुभव लेकर आए हैं।

श्री प्रदीप कुमार मिश्र
निदेशक (वाणिज्य)

श्री प्रदीप कुमार मिश्र 23.04.2018 को निदेशक (वाणिज्यिक) के रूप में कंपनी से जुड़े।

12.02.1961 को जन्मे, श्री प्रदीप कुमार मिश्र उत्कल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं। भारतीय इस्पात प्राधिकरण में वर्ष 1983 में उन्होंने प्रबंधन प्रशिक्षु रूप में विृत्तक आजीविका के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की। वे विपणन प्रबंधन के क्षेत्र में अपने साथ गहन एवं विविध अनुभव लेकर आए हैं। भारतीय इस्पात प्राधिकरण में 35 वर्षों अपने सेवाकाल के दौरान वे भारतीय इस्पात प्राधिकरण के तीन क्षेत्रों में क्षेत्रों क्षेत्रीय प्रबंधक बनने सहित विभिन्न पदो पर तैनात थे। उन्होंने कार्यपालक निदेशक के रूप में 3 वर्षों के लिए, भारतीय इस्पात प्राधिकरण के समतल उत्पादो के घरेलू विपणन की अगुआई की। श्री िमश्र को भारतीय इस्पात प्राधिकरण में विपणन क्षेत्र में उनके असाधारण अंशदान के लिए गौरवािन्वत जवाहर पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

श्री श्रीधर पात्र
निदेशक (वित्त)

Born on 12.10.1964, Shri Patra is a graduate in Commerce from Utkal University and a Member of Institute of Chartered Accountants of India. He has also done MBA (HRD) from Vidya Sagar University. He has more than three decades of experience in various Public Sector Undertaking like Odisha Mining Corporation Ltd., Indian Rare Earths Ltd. and Mangalore Refinery & Petrochemicals Ltd. (A subsidiary of ONGC Ltd.). He has contributed as an academician apart from his professional employment in PSUs. Before joining NALCO as Director (Finance), he served as Director (Finance) of THDC India Limited from 02.08.2013 to 31.08.2018.

स्वतन्त्र निदेशक

प्रो. दामोदर आचार्य
स्वतन्त्र निदेशक

प्रो. दामोदर आचार्य दिनांक 21.11.2015 को स्वतन्त्र निदेशक के रूप में निदेशक-मंडल से जुड़े थे।.

2 अप्रैल, 1949 को जन्मे, प्रो. दामोदर आचार्य के पास एनआईटी, राउरकेला से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री, आईआईटी, खड़गपुर से मास्टर एवं पीएच.डी. डिग्री है। ये वर्ष 1976 में इसी संस्था में इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग फैकल्टी में शामिल हुए। इन्होंने संस्था की सभी जिम्मेदारियो में अपनी अमिट छाप छोड़ी है,चाहे विभाग के प्रधान,अध्यक्ष जेईई, डीन (प्रायोजित रिसर्च एवं इंडस्ट्रियल कन्सल्टेंसी), कार्यपालक निदेशक एसटीईपी, विनोद गुप्ता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के अध्यक्ष या देश के सर्वप्रथम एवं बहृत्तम आई आई टी के निदेशक के रूप में।

बीजू पटनायक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के वाइस चांसलर के रूप में, इन्होंने एक सुदृढ़ टेक्निकल यूनिवर्सिटी एडुके शन प्रणाली की बनुियाद रखी, जिसका अनुकरण अन्य लोगो के द्वारा किया जा रहा है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष थे।

इन्होंने आईआईटी,भुवनेश्वर की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है एवं इसके प्रथम मेन्टर डायरेक्टर (परामर्शी निदेशक) थे। ये चार वर्ष तक भारतीय रिजर्व बैंक के केन्द्रीय निदेशक-मंडल में गैर-सरकारी निदेशक रहे और आरसीएफ में तीन वर्षों के लिए स्वतंत्र-निदेशक रहे।

प्रो. आचार्य छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग के एक सदस्य हैं। ये इडको एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण के निदेशक-मंडल में भी हैं एवं एसओए विश्वविद्यालय के सलाहकारी निदेशक-मंडल के अध्यक्ष भी हैं।

श्री दीपंकर महन्त
स्वतन्त्र निदेशक

श्री दीपंकर महन्त निदेशक-मंडल में 21.11.2015 से अंशकालिक गैर-सरकारी (स्वतन्त्र) निदेशक के रूप में नियुक्त हुए।

12 दिसम्बर, 1965 को जन्मे, श्री दीपंकर महन्त ने गौहाटी विश्वविद्यालय से एम.बी.ए. किया और लघु उद्योगो के उत्पादो के विपणन के उद्देश्य के साथ मेसर्स कोन्सोर्ट मार्केटिंग नामक एक उद्यमीय प्रयास आरम्भ किया। तत्पश्चात्, गौहाटी स्टॉक एक्सचेञ्ज में योगदान किया और भारतीय पँूजी बाजार से संबंधित विभिन्न क्षमताओ पर सेवा की। वे पूर्वोत्तर क्षेत्र (एन.ई.आर.) में अपना कार्यान्वयन कर रही तथा गुणवत्तापूर्ण सलाहकारी सेवाएँ प्रदान करने के उद्देश्य वाली एक कं पनी, इकोनोमिक एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कोलाबोरेटिव (इंडिया) प्रा. लि., के प्रवर्तक निदेशक थे। वे गौहाटी के निकट एल.बी. एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के लिए एक हाथ-निर्मित कागज एकक की डिजाइन बनाने और कार्यान्वयन में सलाहकार थे। एनईसी के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के इंडस्ट्रियल ट्रेनिग इंस्टीट्यूट (आईटीआई) के नैदानिक अध्ययन एवं एन.ई.एच.एच.डी.सी. के लिए हस्तशिल्प उत्पादो को बेचने वाले एक मार्केट कॉम्प्लेक्स का व्यवहार्यता अध्ययन एवं डी.पी.ई.पी. के लिए भाषा सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारको के अध्ययन, नेशनल बम्बू मिशन के लिए “असम में बाँस और बाँस के उत्पादो” पर अध्ययन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, असम के लिए “असम में ईंट क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक अध्ययन” जैसी परियोजनाओ में ये सह-परामर्शदाता भी रहे थे। इन्होंने विभिन्न क्षमताओ में एक स्वैच्छिक संगठन विवेकानंद केंद्र की भी सेवा की है और तत्पश्चात पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारतीय सांस्कृतिक प्रलेखन एवं अनुसंधान पर एक विशिष्ट परियोजना, विवेकानंद केंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चर (वीकेआईसी) के रिसर्च काउंसिल के सहयोगी निदेशक थे। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन सीएपीएआरटी (एनईजेड) को भी इन्होंने सेवा दी थी।

वर्तमान में, ये विभिन्न सामाजिक सं गठनो के साथ सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं जिनमें से विवेकानन्द केन्द्र और श्रीमंत फाउंडेशन फॉर कल्चर एवं सोसाइटी प्रमुख हैं। ‘आत्मज्ञान और इसके प्रबन्धन’ पर शिक्षण सत्रों के लिए वे एक विषय विशेषज्ञ और प्रशिक्षक भी हैं।

श्री महेश्वर साहु
स्वतन्त्र निदेशक

श्री महेश्वर साहु दिनांक 21.11.2015 को अंशकालिक गैर-सरकारी (स्वतन्त्र) निदेशक के रूप में निदेशक-मं डल से जुड़े थे।

श्री महेश्वर साहु ने एनआईटी, राउरके ला से वर्ष 1977 में इलेक्ट्रिकल में बी.एससी. (इंजी) की है एवं वर्ष 1994 में यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम से एम.एससी.की। सन् 1980 में भारतीय प्रशासन सेवा (आईएएस) से जुड़े। वर्ष 2014 में अपर मुख्य सचिव, गुजरात सरकार के रूप में सेवा निवृत्त होने से पूर्व तीन दशको से भी अधिक समय तक विभिन्न क्षमताओ में इन्होंने भारत सरकार एवं गुजरात सरकार की सेवा की है। ये 20 वर्षों से भी अधिक समय से उद्योग में एवं 10 वर्षों से भी अधिक समय से लोक उद्यमो के प्रबंधन की सक्रिय सेवा से जुड़े रहे हैं। इन्होंने युनाइटेड नेशन्स इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन में 3 वर्षों से अधिक समय के लिए कार्यकिया। चार वाईब्रेंट गुजरात के आयोजनो में इन्होंने सक्रियता से जुड़े रहकर प्रेरणा स्रोत की भूमिका निभाई।

इन्होंने अनेक केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमो में निदेशक के रूप में सेवा दी है। ये कई राज्य लोक उद्यमो में अध्यक्ष/निदेशक भी थे। ये अब अनेक कंपिनयो के साथ स्वतंत्र निदेशक/अध्यक्ष के रूप में जुड़े हुए हैं। रणनीतिक प्रबंधन, लोक प्रशासन, निगमित अभिशासन आदि इनकी विशेषज्ञता के क्षेत्रों में शामिल हैं।

श्री एस. शंकररमण
स्वतन्त्र निदेशक

श्री एस. शं कररमण दिनांक 21.11.2015 से निदेशक-मं डल में अंशकालिक गैरसरकारी निदेशक नियुक्त किए गए थे।

19 मई, 1962 को जन्मे श्री एस. शंकररमण भारतीय सनदी लेखापाल सं स्थान (आईसीएआई) के फेलो सदस्य हैं। श्री शंकररमण पेशियो के दुर्विकास से प्रभावित रहे हैं एवं 12 वर्ष की उम्र से व्हील चेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं। वर्तमान में, ये विसक्षम एवं जरूरी सुविधाओ से वंचित लोगो की भलाई से जुड़े एक संस्थान अमर सेवा संगम के मानद सचिव हैं। वर्ष 1992 में अमर सेवा संगम से जुड़ने के पूर्व विभिन्न निगमित क्षेत्रों को क्षेत्रों व्यावसायिक सेवाएँ प्रदान करते हुए इन्होंने वर्ष 1985 में अपने कैरियर की शुरुआत की। अपने क्षेत्र में पुनर्वासन एवं विकास केंद्र के रूप में “अपंग व्यक्तियो के लिए स्थल” की स्थापना करते हुए एवं गाँव में जीवन-स्तर को बेहतर बनाने के लिए समाज के साथ अपंग व्यक्तियो को जोड़ने के उद्देश्य से स्व-सहायी पहलो के मॉडल विकसित करते हुए अपंग व्यक्तियों को सशक्त बनाना इनका लक्ष्य रहा है।

वे अपंग व्यक्तियो के अधिकारो के लिए एक चैम्पियन हैं एवं इनका मानना है कि अपंगता कोई रोधक या बाध्यता नही है, बल्कि एक स्थिति है जिसे पुनर्वासन एवं समर्थता के सही मेल से सुव्यवस्थित किया जा सकता है। आधुनिकतम बनुियादी सुविधाओ एवं हर उम्र, वर्ग एवं अपंगता की हर श्रेणी में उच्च दर्जे के पुनर्वासन कार्यक्रम की सुविधा से इन्होंने अपनी ्हों प्रेरणा से अमर सेवा सं गम का विकास करके एक छोटी-सी शुरुआत की जिसे आज अपंग व्यक्तियो के पुनर्वासन क्षेत्र में सक्षम नेतृत्व के मौजूदा दर्जे तक पहुँचाया है। जन समुदायो को सम्मिलित करते हुए अपंग व्यक्तियो के पुनर्वासन के लिए नवीन मॉडल को विकसित करने में ये मार्गदर्शक रहे हैं एवं इनके पास एक अति विशिष्ट गाँव आधारित पुनर्वासन पहल है जिसे देश के सबसे बेहतर मॉडल में से एक होने की स्वीकृति मिली है। ये एनजीओ क्षेत्र के व्यावसायिकीकरण में विश्वास करते हैं एवं अमर सेवा सं गम के सभी कार्यों को प्रणालियो एवं पद्धतियो से कम्प्यूटरीकृत किया है। इन्होंने विसक्षम क्षेत्र में कानून पर राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार आयोजित किया जिसके परिणामस्वरूप 1996 में भारतीय सं सद में विसक्षम व्यक्ति अधिनियम तथा अन्य कई पारित हुए। ये विभिन्न मैराथन में हिस्सा लेते हैं, खास करके स्टैंडर्ड चार्टर्ड मं बई मैराथन में इसकी शुरुआत से ही हिस्सा ले रहे हैं एवं ऐसी गतिविधियो में अपंग व्यक्तियो को शामिल करने के लिए मार्ग प्रशस्त किया। देश भर के विभिन्न मं चो में अपंगता के अधिकारो पर इन्होंने ्हों दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। गांधी ग्राम ट्रस्ट (कोषाध्यक्ष), गांधीग्राम, डिंडिगुल, मौलिक अधिकार के लिए सामूहिक कार्यवाही फाउंडेशन (मानद उपाध्यक्ष), बेंगळूरु, विसक्षम व्यक्तियो के लिए तमिलनाडु उदविक्करम एसोसिएशन (स्थापक सदस्य), चेन्नै, नेशनल इंस्टीच्यूट फॉर एम्पॉवरमेंट ऑफ पर्सन्स विथ मल्टिपल डिजेबिलिटिज (सदस्य) सहित कई गैर-लाभकारी ट्रस्ट के सदस्य एवं निदेशकमं डल सदस्य रहे हैं और लोकोमोटर विसक्षमता को उपस्थापित करने के लिए इन्हें 5 मई 2017 को तमिलनाडु स्टे कमिशनरेट फॉर द डिफरेंटली एबल, चेन्नै का सदस्य नियुक्तकिया गया है। उन्हें नवीकरण के लिए अशोक फेलोशिप से सम्मानित किया गया और उनकी सेवाओ की मान्यता स्वरूप राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार मिले हैं, जिनमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से एक राज्य पुरस्कार और भारत के राष्ट्रपति से दो बार मिले राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं।

श्री प्रभात केशरी नायक
स्वतन्त्र निदेशक

श्री प्रभात केशरी नायक को 21.11.2015 को निदेशक मंडल में अंशकालिक गैर-सरकारी (स्वतंन्त्र) निदेशक नियुक्त किया गया था।

श्री प्रभात के शरी नायक, पेशे से सनदी लेखापाल हैं और मेसर्स पी.के . नायक एण्ड कं. नामक एक अग्रणी सीए फर्म के वरिष्ठ साझेदार हैं, जहाँ वे सरकारी एवं निजी क्षेत्रों को ब क्षेत्रों ड़े स्तर पर व्यावसाियक सेवाएँ प्रदान करते हैं। उनका तीन दशको से अधिक का व्यावसाियक अभ्यास है। उनकी िवशद वित्तीय विशेषज्ञता एवं अनुभव सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों एवं कई निगमो, बैंको एवं अन्य वित्तीय संस्थानो भर में विख्यात है। वे ओड़िशा में सार्वजिनक क्षेत्र के उपक्रमो की पुनः संरचना के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के सुधार पर एडम स्मिथ इंटरनेशनल, यके के सलाहकार रहे हैं। वे विधि में डिग्री एवं इन्फॉर्मेशन सिस्टम ऑडिट (आईसीएआई) में डिप्लोमाधारी हैं।

उन्होंने सरकार के िलए लेखा परीक्षा हाथ में लेने एवं बड़े सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओ में स्वतंत्र लेखा परीक्षक के कार्य के अलावा यवा-उद्यमियो एवं स्टार्ट-अप्स का अग्र-सक्रिय रूप से मार्गदर्शन किया है। उन्होंने िव्हों त्त, कराधान और लेखा-परीक्षा से संबंधित कई राष्ट्री य सेमिनारो एवं सम्लनो मे में भी हिस्सा लिया है।

श्रीमती किरण घई सिन्हा
स्वतन्त्र निदेशक

सुश्री किरण घई सिन्हा दिनांक 03.02.2017 से निदेशक-मंडल में अंशकालिक गैर-सरकारी (स्वतन्त्र) निदेशक नियुक्त हुईं।

ये लगातार तीन कार्यकालो के लिए पटना विश्वविद्यालय की सीनेट की सदस्य हैं। ये स्काउट्स एवं गाइड्स फे लोशिप, बिहार की अध्यक्ष भी हैं। ये नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार की हिन्दी सलाहकार समिति की सदस्य (गैर सरकारी) हैं।

सुश्री सिन्हा ने पटना विश्वविद्यालय से हिदी में एम.ए.किया। ये एक एसोसिएट प्रोफे सर, हिन्दी विभाग, पटना महिला महाविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय के पद से सेवानिवृत्त हुईं। सुश्री सिन्हा 2004-10 और फिर 2010-16 के दो लगातार कार्यकालो के लिए बिहार विधान परिषद (बीएलसी) की सदस्य भी रही। एम.एल.सी. के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इन्हें गृह की तीन समितियो की अध्यक्षता का सुअवसर मिला, यथा- शहरी विकास समिति, राजभाषा समिति एवं बाल परिरक्षण व महिला सशक्तीकरण समिति। ये स्थानीय मं डल (पूर्वांचल), रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (2001-2004) की सदस्य और दो कार्यकालो के लिए प्रबंध निदेशक मं डल, राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, बिहार की भी सदस्य रही। ये 48वें और 50वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में गैर-फीचर फिल्म संवर्ग में और फीचर फिल्म सं वर्ग में निर्णायक-मंडल की सदस्य भी रही। संयुक्त राष्ट्र, य॰एस॰ए॰ (2007) में आयोजित विश्व हिन्दी सम्लन के राज्य प्रतिनिधि-मंडल में ये एक सदस्य थी।

श्री नागेन्द्र नाथ शर्मा
स्वतन्त्र निदेशक

श्री एन एन शर्मा दिनांक 06.09.2017 से निदेशक मंडल में अंशकालिक गैर-सरकारी (स्वतन्त्र) निदेशक नियुक्त हुए थे।

12 अगस्त 1950 को जन्मे, श्री एन एन शर्मा ने मैके निकल इंजीनियरिंग में बी.एससी की है। वर्तमान में, वे बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बीआईएमटीईसीएच), ग्रेटर नोएडा में सेन्टर फॉर कॉर्पोररेट सोशल रेस्पान्सिबिलिटी एण्ड सस्टेनिबिलिटी के अध्यक्ष हैं। वे एसीसी लि. के समाज लेखा परीक्षा समिति के सदस्य भी हैं। श्री शर्मा ने एनटीपीसी, एनएचपीसी, भारतीय इस्पात प्राधिकरण एवं एनपीसीआईएल जैसे निगमों के नि.सा.उ. विृत्तको के क्षमता विकास कार्यक्रम का संचालन किया है। समाज विकास के क्षेत्र में इनके पास कार्य करने का तीन दशको से अधिक का अनुभव है। आई.एफ. सी.आई. द्वारा स्थापित राजस्थान कन्सल्टेन्सी ऑर्गेनाइजेशन (आर.ए.जे.सी.ओ.एन.) एवं अन्य विकास सं गठनो के प्रबंधक निदेशक थे और उ.प्र.अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम के प्रथम महाप्रबंधक भी थे।

उन्होंने यूएनडीपी एवं यूएनआईडीओ के साथ भी कार्य किया है और विश्व बैंक तथा डीएफआईडी, यके द्वारा समर्थित परियोजनाओ से भी जुड़े हुए थे।

श्रीमती अचला सिन्हा
स्वतन्त्र निदेशक

श्रीमती अचला सिन्हा दिनांक 08.09.2017 को निदेशक मंडल में अंशकालिक गैर-सरकारी (स्वतन्त्र) निदेशक नियुक्त की गई थी।

श्रीमती अचला सिन्हा ने पटना िवश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए., पंजाब विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में एम.फिल., भारतीय लोक प्रशासन सं स्था (आईआईपीए), नई दिल्ली से एडवान्स प्रोफेशनल प्रोग्राम इन पब्लिक एडमिनिस्शन (एपीपीए) की है।

वे 1982 बैच के भारतीय रेल की यातायात सेवा अधिकारी (आईआरटीएस) हैं। वर्ष 1984 में उन्होंने प ्हों ूर्व रेलवे के दानापुर मं डल से सहायक वाणिज्य प्रबंधक के रूप में अपनी आजीविका की शुरुआत की थी एवं तीन दशको से भी अधिक समय से विभिन्न क्षमताओ में रेल मंत्रालय में निदेशक (पर्यटन), कार्यपालक निदेशक (साख्यिं की और आर्थिक) एवं उत्तर रेलवे के दिल्ली मं डल में मुख्य यातायात प्रबंधक के रूप में कार्यकिया है। अक्टूबर, 2016 में अपने सेवा निवर्त्तन के पूर्व अपर सचिव, केन्द्रीय सूचना आयोग के रूप में भी अपनी सेवा दी। उन्होंने वार्षिक रेल सप्ताह के दौरान अपने असाधारण कार्य-प्रदर्शन के लिए महाप्रबंधक पूर्व रेलवे पुरस्कार एवं आईआईपीए, नई दिल्ली की ओर से 30 वें एडवान्स प्रोफे शनल प्रोग्राम इन पब्लिक एडमिनिस्शन ट्रे (एपीपीए) में सर्वश्रेष्ठ महिला भागीदारी का पुरस्कार जीता है। भारतीय रेल और साथ ही नगर विकास मंत्रालय, भारत सरकार की कार्यप्रणालियो को बेहतर बनाने के लिए कई संकल्पनात्मक लेख भी लिखा है। इनमें से कई सं कल्पनाओ पर चर्चा की गई है एवं कार्यान्वित की गई है।